प्रधानमंत्री उज्जवला योजना- मुक्ति धुएं के आंसुओं से

By: Deepa, 2016-04-24 11:30:00.0Category:  आदर्श्
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'गिव ईट अप ' अभियान  की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी ने 27 मार्च 2015 को की थी | इसकी शुरआत करने का प्रमुख कारण ये था कि जो व्यक्ति, परिवार संपन्न और समृद्ध हैं यदि उनके पास सब्सिडी वाला सिलिंडर है तो वो अपनी इस सब्सिडी का त्याग कर दे ताकि उनके द्वारा छोड़ा गया ये अधिकार का इस्तेमाल सरकार और गरीबों की मदद करने  में कर सकती है जिन्हे सही मायनो में इसकी आवशयकता है | इस अभियान का लोगों ने स्वागत किया इसका प्रमाण इस बात से पता चलता है की अब तक अभियान के तहत करीब 1 करोड़ 13 लाख लोगों ने अपनी सब्सिडी छोड़ी है और इसका प्रभाव ये हुआ की 60 लाख गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन मिल सका | जिन राज्यों ने इस अभियान में बढ़ चढ़कर भाग लिया  हैं वो  हैं - महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक और तमिलनाडु I 
 
इसी अभियान को एक कदम आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने "'प्रधानमंत्री उज्जवला योजना" की शुरुआत की है |  प्रधानमंत्री 1 मई को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से 'प्रधानमंत्री उज्जवला योजना' की शुरुआत करने जा रहे हैं। इस योजना के तहत तीन वर्ष में 5 करोड़ गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन वितरित किए जाएंगे और इस साल करीब 1.5 करोड़ महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 8000 करोड़ रु का प्रावधान किया गया है | इससे महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर काफी सकरात्मक प्रभाव पड़ेगा और उन्हें घरेलू वायु प्रदुषण( indoor air pollution  )  से काफी हद तक छुटकारा मिलेगा I  

वुड फ्यूल और चारकोल जैसे जैव ईंधन के जलने से जो प्रदूषक उत्पन्न होते हैं उसका बहुत ही नकरात्मक प्रभाव पड़ता है इनमे प्रमुख हैं carbon monoxide, benzene, butadiene, formaldehyde, polyaromatic hydrocarbons  इत्यादि I इनका संपूर्ण बिघटन न होना ही स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या उत्पन्न करता है | जिसमे निमोनिया, अस्थमा, अंधापन, फेफड़ों का कैंसर, टीवी जैसी बीमारियां प्रमुख हैं |  

World Health Organization (WHO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक घरेलु वायु प्रदुषण से हर साल भारत में 5,00,000  जानें  जाती हैं जिसमे मुख्य्ता औरतें और बच्चे होते है| WHO के मुताबिक साउथ ईस्ट एशिया में होने घरेलु वायु प्रदुषण से होने वाली 600000   मौतों का 80 % भाग भारत के हिस्से में आता है इनमे से 70 % ग्रामीण घरों में वेंटिलेशन की व्यवस्था भी नहीं है | WHO के मुताबिक ग्रामीण रसोईघरों में पाया जाना वाला प्रदुषण साधारणतया निर्धारित किये प्रदुषण स्तर से 30 गुना ज्यादा है और राजधानी में पाए जाने वाले प्रदुषण से 6 गुना ज्यादा !! 

इस परिपेक्ष्य में "प्रधानमंत्री उज्जवला योजना" ग्रामीण महिलाओं के लिए एक वरदान साबित हो सकती है और ये महिला सशक्तिकरण की तरफ एक और कदम है |
 

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