जम्मू कश्मीर की राजनीती और महिलाओं का योगदान

By: Deepa, 2016-04-04 12:30:00.0Category:  जागरूकता
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महबूबा मुफ़्ती ने जम्मू कश्मीर की प्रथम महिला मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली I जम्मू कश्मीर के इतिहास में ये बात हमेशा के लिए याद रखी जाएगी लेकिन हमे इस बात पर भी ध्यान देना होगा की जम्मू कश्मीर के राजनैतिक गलियारें में महिलायों की क्या भूमिका और क्या संख्या है| हम केवल एक महिला की सफलता को इस बात का परिमाण नहीं मान सकते है की जम्मू कश्मीर की राजनीती  महिलायों के लिए उदार है I  जम्मू कश्मीर के संविधान को खंगालने पे पता चलता है पार्ट १० चुनावों के बारे में वर्णन देता है तथा ये भी बतलाता है की चुनावों में महिलायों को हिस्सा लेने और वोट करने का पूरा अधिकार है|

अगर हम थोड़ा पीछे की और जाएं तो पता चलता है की जम्मू कश्मीर में 1972 से पहले महिलायों ने राजनीती में सफलतापूर्वक प्रवेश नहीं पाया था | 1972 में पहली बार 6 में 4 महिलायों ने चुनाव जीत के अपनी उपस्थि  दर्ज़ कराई जो की कुल सीटों का 5.33 % था , परन्तु उस के बाद से कभी भी महिलायों की संख्या का प्रतिश्त असेंब्ली में 3% से ज्यादा नहीं रहा यदपि चुनाव में भाग लेने वाली महिलायों का प्रतिशत  लगातार बढ़ता जा रहा है ..परन्तु उनकी स्वीकार्यता कम हो रही है| अगर हम 2014 के जम्मू कश्मीर के चुनाव  की बात करें तो 46 सीटों में सिर्फ 9 महिलायों ने पाई |

                                    

इन राजनीतिक महिलायों के नाम लेना बहुत जरूरी है क्यूंकि हमें जम्मू कश्मीर की राजनीती में महिला राजनीतिज्ञों में महबूबा मुफ़्ती के अलावा और कोई नाम समझ नहीं आता|

1. हिना भट्ट - पेशे से डेंटिस्ट रह चुकी हिना बीजेपी से है I 
2. सकीना इतू - ये सोशल वेलफेयर मिनिस्टर रह चुकी है और नेशनल कॉन्फ्रेंस से है I 
3. सुरैया बनो - ये रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया से सम्बन्ध रखती है I 
4. आसिया नकश - लॉ ग्रेजुएट आसिया पीडीपी से है I 
5. रशीदा मीर - ये स्वतंत्र उम्मेद्वार थी कुलगाम असेंबली क्षेत्र से I 
6. हनीफा बेगम - ये बीएसएफ के शहीद जवान की विधवा है और इन्होने जम्मू कश्मीर पीपल पीस फ्रंट की टिकट से चुनाव लड़ा था I 
7. दरख्शां अंद्राबी - ये बीजेपी से है I 
8. शमीमा फिरदौस - ये नेशनल कॉन्फ्रेंस की सीनियर लीडर है I 
9. महबूबा शादाब - ये स्वंत्र उम्मीदबार के तौर पे जानी जाती है ये श्रीनगर के सोनवर की रहने वाली हैI 

इस प्रकार ये जम्मू कश्मीर की वर्त्तमान राजनीती के आकाश में चमकने वाले चंद नाम है इनके अलावा अगर हम इन महिलायों के अगुवा और प्रेरणा को ढूंढे तो इतिहास में जो सबसे ज्यादा नाम लिया जाता है वह है बेगम अकबर जहाँ अब्दुल्लाह का जो की जम्मू कश्मीर के 3 बार मुख्यमंत्री रह चुके शेख  अब्दुल्लाह की पत्नी थी और उन्होंने छठी और आठवीं  लोक सभा में  1977 से  1979 and 1984 से  1989 तक जम्मू कश्मीर के श्रीनगर और अनंतनाग का प्रतिनिधित्व किया I इसके अलावा उन्होंने कई सभायों का प्रतिनिधित्व किया| उन्हें कश्मीर का मदर-ऐ-मेहरवान की उपाधि दी गई थी I 

इस प्रकार हमे पता चलता है जम्मू कश्मीर जैसी जगह पर जहाँ पुरुषों को भी चुनाव में भाग लेने से पहले सोचना पड़ता ऐसी स्थिति में महिलायों की संख्या का बढ़ना एक सकरात्मक सोच की ओर इशारा करता है परन्तु हमे उनकी स्वीकार्यता को भी बढ़ावा देना होगा| उनके बड़े हुए हौसलों को नए पंख देने होंगे ताकि वह ऊंचाई को छु सके ये जिम्मेदारी न केवल जम्मू कश्मीर के राजनीतिक आकाओं की है बल्कि साधारण जनता की भी है|  इस परिदृश्य पर  कुछ पंक्तियां याद आ रही है जो की कही पढ़ी थी

उनके  चले  हुए  रास्तों  को  कई  बार  नाप  लिया , 
आज  मुझे  भी  अपनी  पहचान  बना  लेने  दो|
कागज़  की  कश्तियों  में  कई  बार  सफर  कर  लिया  , 
अब  एक  लम्बी  उड़न  भर  लेने  दो ||

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