पनामा पेपर लीक, अमीरों का अमीर भ्रष्टाचार

By: Deepa, 2016-04-05 00:00:00.0Category:  अपराध
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image source: India Express

काला धन का मुद्दा भारत में नया नहीं है इसी चुनावी वादे के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने कुर्सी संभाली थी| अगर काले धन की बात की जाए तो भारत का कितना काला धन विदेशो में है ये तो अज्ञात है परन्तु एक अनुमान के मुताबिक 50 ट्रिलियन डॉलर काला धन विदेशो में जमा है| एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार जो की स्विस बैंकों ने जारी की है, केवल 2 बिलियन डॉलर ही विदेशो में जमा है ,काला धन हमारे देश की विकराल समस्या है|  हमारे देश के पतन का सबसे बड़ा कारण भी यही है | पर ये बेमानी और भ्रस्टाचार सिर्फ हमारे देश की समस्या नहीं है बल्कि एक वैश्विक समस्या है| पनामा पेपर्स लीक इसका सबसे बड़ा उदहारण है| इन गोपनीय दस्तावेज़ों से पता चलता है की कई देशों के अमीर लोग कैसे अपने काले धन को सफ़ेद करने व टैक्स बचाने के लिए अवैधानिक रास्ता इस्तेमाल करते हैं| 1 करोड़ 50 लाख दस्तावेज जो की पनामा की कंपनी मोससक फोंसेका से जब्त किये गए इस बात का प्रमाण है |

                                                    

जर्मन अखबार ज़ूटडॉयच ट्सायटूंग ने इन दस्तावेज़ों को हासिल किया था इसे इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ़ इनवेस्टिगेटिव जॉर्नलिस्ट के  साथ साझा किया | 
इस कंपनी की सेवाएं लेने वाले कई नामी उद्यमी,खिलाडी, नेता अभिनेता,और शासनाध्यक्ष है इसमें कई तो तानाशाह भी है| इतने बड़े स्तर पर इसका विस्तार इस बात की ओर इशारा करता है की कही न कही  इसे कई देशों का  अंतर्राष्ट्रीय स्तर पे सरंक्षण प्राप्त है य्दय्पि कंपनी का दावा है उसने कोई भी गैर कानूनी काम नहीं किया है |

                                                               

जहाँ तक भारत की बात है हम पहले ही बात कर चुके हैं की भारत की अब यह विकट समस्या है इसलिए इस पर दो राय नहीं होना चाहिए की इन पेपर्स में लगभग 500  भारतीयों के नाम भी सामने आये है|  इन  भारतीय नामो में इंडियन एक्सप्रेस ने 11 नामो का खुलासा किया है| 

ये इस प्रकार है :
1 .गरवारे परिवार 
२.शिशिर के बाजोरिया 
३ .ओंकार कँवर
४.हरीश साल्वे 
५. जहांगीर सोली सोराबजी
६. मोाहन लाल लोहिया 
७.जवरय पूनावाला
८.राजेंद्र पाटिल 
९.अनिल वासुदेवा सलगओकर 
१०.इंदिरा सिवसैलम और मल्लिका श्रीनिवासन 
११ . अब्दुल रशीद मीर & तबसुम 
इसके अलावा अपोलो टायर्स और इंडिया बुल्स के प्रमोटर्स के अलावा बॉलीवुड के अमिताभ और ऐश्वर्या राय बच्चन के नाम भी उलेखनीय है I 

इन भारतीयों के नामो का खुलासा होते ही प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी जाँच के आदेश दिए तथा इसके बाद वित्त मंत्रालय ने रिज़र्व बैंक, सीबीडीटी और वित्तीय खुफिया इकाई की एक टीम बनाकर जाँच करने को कहा है इसके अलावा एसआईटी भी अपने स्तर पर जाँच करेगी | इन् सब राष्ट्रीय और अंतरास्ट्रीय प्रयासों के बाबजूद यह कहना बहुत कठिन है की इन जांचों का क्या फल होगा क्यूंकि एक तो इन टैक्स हैवन देशों के कानून ऐसे होते है जिससे ऐसे काम करने वालो को पूर्ण संरक्षण प्राप्त होता है | भारत में भी ऐसा ही है यहाँ  भी भारतीय सरकार और पार्टियां ऐसे ही लोगों के सहारे चलती है जिनका काफी कल धन विदेशों में जमा है इसलिए कोई भी सरकार जो सत्ता में होती है ऐसा लोगो का नाम लेने और उनके खिलाफ कार्यवाही करने में हिचकती है | वैश्विक स्तर पर भी हमें ऐसी ही उम्मीद लगानी चाहिए  I 
इस खुलासे ने हमे इस बात पर सोचने पर मजबूर कर दिया है की आज जबकि समस्त विश्व में गरीबी बढ़ती जा रही है अमीर और अमीर , गरीब और गरीब  होते जा रहे हैं ऐसे में इस तरह की घटनाएं मानवता के मुंह पे एक जोरदार तमाचा है क्यूंकि इस छुपे हुए धन से विश्व के कई गरीब देशों की अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सकता है I 
 

महान राजनीतिशास्त्री कौटिल्य महाराज ने अपने अर्थशास्त्र में कहा है कि

दूष्यस्यादूषणर्द्यंव परित्यागो महयतः।
ऋते राज्यापह्यरातु युक्तदण्डा प्रशस्यते।।


यानी की दुष्य तथा दूषित अर्थ का अवश्य त्याग करना चाहिए। नीति ज्ञाताओं ने अर्थ हानि को ही अर्थ दूषण बताया है।

होकलवायर असाइनमेंट

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