भारत माता की जय या मादरे वतन ज़िंदाबाद ?

By: Deepa, 2016-04-07 14:30:00.0Category:  जागरूकता
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भारत माता की जय या मादरे वतन ज़िंदाबाद !!! फालतू का विवाद फैला पड़ा है| या कहो देश का रायता बना कर फैला रखा है | आइये एक कहानी सुनते हैं - 

हुआ यूँ की एक घर था बहुत सुंदर और बड़ा ,वहां एक औरत अपने दो बेटों के साथ रहती थी ,दोनों बेटे अपनी माँ को बहुत प्यार करते थे देखभाल करते थे एक दिन माँ बीमार पड़ी डॉक्टर ने उन्हें आराम करने की सलाह दी ,शांति व देखभाल करने को कहा , दोनों बेटों ने सुना और बहस करने  लगे पहला बोल में रखूँगा अपनी "माता " का ख्याल दूसरे ने कहा नहीं मैँ  ज्यादा प्यार करता हूँ अपनी "मदर" से मैँ रखूँगा ख्याल उनका | बहस बढ़ती गई झगड़ा बड़ गया ,माँ समझाती रह गई , टकराव बड़ गया माँ को दिल का दौरा पड़ा माँ चल बसी I इस अहम और शब्दों के जाल जंजाल मैँ किसी को माँ का ख्याल नहीं आया, माँ का ख्याल रखना था शब्दों का नहीं I 

समझदार को इशारा काफी है, देश की चिंता करो उसकी जयकार की नहीं, देश के लोगों की चिंता करो नारों की नहीं I यह बहुत दुःख का विषय है कि भारत जैसे गरीब देश जहाँ इतनी गरीबी है, बीमारियां है, क़र्ज़ में डूबा देश जहाँ किसान रोज मर रहे हैं, बेरोज़गारी  बढ़ती जा रही है, पर्यावरण दूषित हो रहा है, सामाजिक सुरक्षा कि कमी है, ऐसी समस्याओं के बीच कुछ  लोग अपनी राजनीती को चमकाने में लगे हैं I इन्होने सच में देश के लिए क्या क्या किया सिवाय भाषण देने के | अगर आप लोग अपने अपने धर्मों के इतने बड़े जानकार है तो राजनीती में क्या कर रहे हैं किसी मंदिर और मस्जिद कि सेवा करिये जाके| यह लोग आज वही कर रहे जो कभी कुछ लोगो ने विभाजन के समय किया| वो सब तो नहीं रहे लेकिन अपने पीछे छोड़ गए नफरत कि एक अंधी दीवार| आज ये लोग भी वही करना चाहते हैं|  आम लोगों के पीठ पे खड़े होके राजनीती का आसमान छूना चाहते हैं| 

बचपन में एक कहानी सुनी थी शीर्षक था "पीएड पीपर ऑफ़ हेमलिन"

इस कहानी के अनुसार हेमलिन राज्य में बहुत ज्यादा चूहे हो गए थे जिन्हे भगाने के लिए एक बांसुरी वाला आया जिसने इन चूहों को भगाने की ज़िमेदारी ली और अपनी मोहक बांसुरी को बजा के भगा भी दिया लेकिन राजा ने उससे पूरा मेहनताना नहीं दिया जिसके चलते उसने बदला लेने केलिए एक बार फिर बांसुरी बजायी और राज्य के सारे बच्चे उसके पीछे  चल दिए और वह उन्हें कहाँ  ले गया किसी को पता नहीं चला केवल तीन बच्चे बच गए जिसमे एक लंगड़ा था एक बहरा था और एक अँधा था|  कुछ लोग इसी तरह धार्मिक भावनाओं जैसे संवेदनशील विषयों की बांसुरी बजाते हैं और मासूम जनता इनके पीछे हो लेती है खुद का दिमाग इस्तेमाल किये बिना |

इसी तरह महान कवि "कबीर" जीवन भर हिन्दू और मुसलमानो के आडंबर के खिलाफ बोलते रहे और आलोचना के विषय बनते रहे और उनकी मृत्यु के बाद वही घिसी पिटी राजनीती शुरू हो गई हिन्दू ने कहा ये जलाए जायेंगे और मुसलमानो ने कहा की नहीं दफनाए जायेंगे जब चादर हटाई गई तोह कुछ फूल मिले, जिन्हे हिन्दुओं ने जला दिया और मुसलमानो ने दफना दिया| वो तो कबीर थे अंतर्ध्यान हो गए लेकिन भारत देश क्या करे कैसे समझाए सबको, कैसे समझाए हिन्दुओं को की भारत एक 3,287,263 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ विशाल भूमि क्षेत्र है इसकी जयकार लगने से अच्छा है इसकी सम्पन्ता के लिए काम करो भारत सच में कोई माता नहीं बस हम दिल से मानते है यहाँ आकर आंतक फैलने वाले  देश के सच्चे  दुश्मन है ना की, इसकी जयकार न लगाने  वाले  और मुसलमानो को भी समझना और सीखना होगा की इस्लाम धर्म इतना संकीर्ण नहीं है इतनी छोटी छोटी बातों से आहत होता रहे इसका उदहारण हमे मौलाना अबुल कलाम आज़ाद से लेना होगा, वह एक स्वंत्रता सेनानी होने के साथ साथ एक महान आलिम भी थे वे एक सच्चे भारतीय और उससे भी ऊपर एक सच्चे मुसलमान  थे I उनकी कुरान पे एक कृति "तर्जुमानुल कुरान " एक ऐसा कार्य है जिसे बड़े बड़े आलिम भी नहीं कर सकते| 17 जुलाई 1948 को जब मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने फगवाड़ा रेलवे स्टेशन  का उद्घाटन किया तो रीती के अनुसार नारियल फोड़ा इस पर पाकिस्तानी के दैनिक डॉन में जिन्ना ने कटाक्ष करते हुए बयां दिया की "आज इन्होने ने नारियल फोड़ा है कल माथे पर तिलक भी लगा लें लेंगे "| इस पर अबुल कलाम आज़ाद ने कहा की मेरा इस्लाम इतना कमजोर नहीं है की नारियल फोड़ने पर उसपे आंच आ जाये ऐसी बातों पे में इस्लाम पर और मजबूती से पाबंद होता हूँ में कोई सियासी मुसलमान नहीं जो कुर्सी और राजनीती के लिए सूट बूट और टाई छोड़कर टोपी और शेरवानी पहन ले I " ये थी उनकी विचारधारा जो की अनुकरणीय है I यह कभी खत्म ना होने वाला विषय है पर मैँ कबीर की इन पंक्तियों को उल्लेखित करते हुए इस विषय को यही समाप्त करती हूँ :-

 

हिन्दू  कहे  राम  मोहि  प्यारा , तुरक  कहै  रहमाना  ||
आपस में  दोउ  लरि मुए ,मर्म न  कोउ  जाना ||
 

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