इतिहास के झरोखें में १८ अप्रैल और चापेकर बंधुओं की शहादत

By: Deepa, 2016-04-18 12:30:00.0Category:  आदर्श्
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आज 18 अप्रैल है | आज का दिन भारतीय क्रांतकारी इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है, हम भगत सिंह, चन्द्रशेखर आज़ाद, खुदीराम बोस,सुखदेव, अशफाकउल्लाह खान जैसे महँ क्रांतिकारियों के बारे में जानते हैं लेकिन क्या हम चापेकर बंधुओं के बारे में जानते हैं? 18 अप्रैल का दिन इन्ही के शहादत से जुड़ा हुआ है

दामोदर हरि चापेकर, बालकृष्ण हरि चापेकर तथा वासुदेव हरि चापेकर इतिहास में चापेकर बंधू के ना से प्रसिद्ध हैं| चाफेकर बंधु महाराष्ट्र के पुणे के पास चिंचवड़ नामक गाँव के निवासी थे। तीनो भाई बाल गंगा धर तिलक के विचारों से काफी प्रभावित थे |
सन्‌ 1897  में पुणे नगर प्लेग जैसी भयंकर बीमारी से पीड़ित था। इस स्थिति में भी अंग्रेज अधिकारी जनता को अपमानित तथा उत्पीड़ित करते रहते थे।

वाल्टर चार्ल्स रैण्ड तथा आयर्स्ट-ये दोनों अंग्रेज अधिकारी लोगों को जबरन पुणे से निकाल रहे थे।  इस समय अंग्रेजों के अत्याचार के विरोध में इन भाइयों ने क्रांति का मार्ग अपना लिया | 22 जून 1897  को पुणे के "गवर्नमेन्ट हाउस' में महारानी विक्टोरिया की षष्ठिपूर्ति के अवसर पर राज्यारोहण की हीरक जयन्ती मनायी जाने वाली थी। इसमें वाल्टर चार्ल्स रैण्ड और आयर्स्ट भी शामिल हुए।  

योजना के अनुसार दामोदर हरि चापेकर रैण्ड की बग्घी के पीछे चढ़ गया और उसे गोली मार दी,  उधर बालकृष्ण हरि चाफेकर ने भी आर्यस्ट पर गोली चला दी। चापेकर बन्धुओं के क्लब में ही दो द्रविड़ बन्धु थे- गणेश शंकर द्रविड़ और रामचन्द्र द्रविड़। इन दोनों ने पुरस्कार के लोभ में आकर अधीक्षक ब्रुइन को चापेकर बन्धुओं का सुराग दे दिया। इसके बाद दामोदर हरि चापेकर पकड़ लिए गए, पर बालकृष्ण हरि चापेकर पुलिस के हाथ न लगे।

सत्र न्यायाधीश ने दामोदर हरि चापेकर को फांसी की सजा दी| 18 अप्रैल 1898 को प्रात: वही "गीता' पढ़ते हुए दामोदर हरि चापेकर फांसीघर पहुंचे और फांसी के तख्ते पर लटक गए| वासुदेव चापेकर को  8मई को और बालकृष्ण चाफेकर को 12 मई 1899 को यरवदा कारागृह में फांसी दे दी गई। 

इस प्रकार अपने जीवन का त्याग देके उन्होंने देशभक्तों के इतिहास अपना नाम हमेशा के लिया अमर कर लिया I 

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