गोद लेने वाले सबसे युवा सिंगल पैरेंट का संघर्ष और जीत

By: Deepa, 2016-04-28 08:30:00.0Category:  आदर्श्
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कहते हैं कि प्यार और स्नेह कि कोई सीमा नहीं होती है, ये कभी भी कहीं भी और किसी को भी हो सकती है| इस बात का साक्षात् प्रमाण है, आदित्य तिवारी जो कि पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं| इन्होने कुछ ऐसा किया है जो इन्हे भीड़ से अलग करके मानवता के सबसे ऊँचे पायदान पे बिठाता है | ये भारत के सबसे युवा सिंगल पैरेंट है, इन्होने 28 साल की उम्र मेीं एक ऐसे बच्चे को गोद लिया जिसे उसके खुद के माता पिता ने छोड़ दिया था क्यूंकि ये बच्चा डाउन सिंड्रोम नामक बीमारी से पीड़ित था और साथ ही उसके दिल में छेद भी है| समाज में तिरस्कार के डर से इन ह्रदय विहीन माता पिता ने उससे अनाथ आश्रम में छोड़ दिया|

सितम्बर 2014 की बात है जब आदित्य तिवारी अपने पिता के जन्मदिन के अवसर पर एक अनाथ आश्रम में अनाथ बच्चों में मिठाईयां बांटने गए थे वही पहली बार उन्होंने बिन्नी को देखा जब आदित्य बिन्नी के पास गए तोह उसने उनकी ऊँगली पकड़ ली आदित्य को बिन्नी से एक जुड़ाव महसूस हुआ पर उनके दिमाग में उससे गोद लेने जैसा कुछ नहीं आया| कुछ महीनो बाद जब वो दुबारा उस आश्रम में गए तोह देखा कई बच्चों को तो गोद लेने वाले माता पिता मिल गए लेकिन बिन्नी को कोई उसकी बीमारी की वजह से गोद लेने को तैयार नहीं हुआ आदित्य ने उसी वक़्त सोच लिया की वो बिन्नी को गोद लेंगे लेकिन इसके  आगे का रास्ता आसान नहीं था क्यूंकि खुद आदित्य के माँ बाप इस बात के लिए तैयार नहीं थे क्यूंकि उनके बेटे की अभी शादी भी नहीं हुई थी और इस बात से उसकी शादी में रुकावटें आ सकती थी|

माँ बाप के  मान जाने के बाद  The Missionaries of Charity  इस बात के लिए राज़ी नहीं हुआ क्यूंकि सिंगल पेरेंट्स एडॉप्शन का उनके यहाँ कोई प्रावधान नहीं था लेकिन आदित्य ने हिम्मत नहीं हारी| उन्होंने सभी तरह की रुकावटों का सामना करने का मन बना लिया था| उसके बाद आदित्य कई बार अनाथ आश्रम गया लेकिन वहां से जब उससे कोई सकरात्मक जवाब नहीं मिला तो उसने Women and Child Welfare Department (WCD) से समपर्क  किया और मेनका गांधी को कई ई-मेल भी लिखें जिसके जवाब में उससे ये जानने को मिला की इंडिया में सिंगल पेरेंट्स एडॉप्शन की उम्र 30 वर्ष है पर आदित्य 30 वर्ष तक इतज़ार नहीं कर सकता था|
उसके बाद उसने कई पार्लियामेंट सदस्यों, मानव अधिकार कार्यकर्ताओं से  संपर्क किया की गोद लेने की उम्र सीमा कम होनी चाहिए इसके अलावा उसने PMO, WCD में समपर्क करना जारी रखा |

कहते की जब आप किसी चीज़ को पाने के लिए सच्चे मन से कोशिश करते हैं तो भगवान भी आप के साथ हो जाते हैं यही हुआ आदित्य के साथ भी| उसकी इस जद्दो जहद के बीच अचानक से एक नियम आया और सिंगल पेरेंट्स के गोद लेने की उम्र सीमा 30 से कम होके 25 हो गई और ये आदित्य के जीवन का नया मोड़ था अब बिन्नी को गोद लेने की साड़ी रुकावटें दूर हो गई थी|

कुछ औपचारिकताओं के बाद बिन्नी को आदित्य को गोद दे दिया गया, डॉक्टर्स ने कहा की यदि वो और बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताएगा तो उसके मानसिक विकास पर सकरात्मक असर पड़ेगा इसलिए बिन्नी को आदित्य ने डे केयर में दाल दिया है जो की उसी बिल्डिंग में है जिसमे आदित्य का ऑफिस है |

बिन्नी जो की अब अवनीश तिवारी है 2 साल का हो गया है काफी खुश है| उसके पिता आदित्य भी खुश हैं जो की भारत की सबसे युवा सिंगल पेरेंट् है जिसने उससे गोद लिया  है क्यूंकि  इतनी कठिनाईओं के बाद उन्हें उनका बेटा मिल गया जिसे उसके खुद के माँ बाप ने त्याग दिया था| ऐसे सकरात्मक सोच हमे मानवता के जीवित होने का प्रमाण देती है I 

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