दो साल मोदी सरकार, फेल या पास : एक लेखा जोखा

By: Deepa, 2016-05-18 08:22:15.0Category:  व्यक्तित्व
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बीजेपी सरकार के दो साल पूरे होने की ख़ुशी में केंद्र सरकार एक बहुत बड़े जश्न की तैयारी में जुट गई है इन कार्यकर्मों की शुरुआत 26 मई को होगी अनुमान है की 200 से ज्यादा कार्यक्रम होंगे और ये आयोजन 15 दिनों तक चलेगा | ऐसा अनुमान है की कार्यक्रमों के आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों को 2  साल में कौन- कौन से  हितकारी कदम उठाये गए हैं, उनका ब्यौरा जनता तक पहुंचाना है | अगर हम 2 साल पीछे चले तो हम देखते हैं की चुनावी अभियान में  मोदी ने कुल 437 जनसभाओं को संबोधित किया. उन्होंने प्रचार का नया तरीका अपनाते हुए 1,350 3डी रैलियां कीं. यह भारत के चुनावी इतिहास का सबसे बड़ा प्रचार अभियान था. भाजपा को इसका फायदा भी मिला. भाजपा ने अकेले 543 लोकसभा सीटों में  से 282 सीटें जीत लीं और एनडीए गठबंधन को कुल 336 सीटें मिलीं. इसके उलट सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस को महज 44 सीटें मिलीं और यूपीए गठबंधन को कुल 60 सीटें मिलीं | इन दो सालों में मोदी सरकार को कई फ्रंट पे सफलता और कई फ्रंट पे असफलता का सामना करना पड़ा 
 
मोदी सरकार की सफलताएं - मोदी सरकार ने कई चुनावी  वादें किये, उन्होंने गरीबों और आम आदमी की तकलीफों को दूर करने वाली कई योजनाओं को लागू किया जिन्होंने काफी हद तक लोगों के मन पर अपनी छाप छोड़ी है -
 
1 . स्व्च्छ भारत अभियान -स्वच्छ भारत' भारत सरकार द्वारा आरम्भ किया गया राष्ट्रीय स्तर का अभियान है जिसका उद्देश्य गलियों, सड़कों तथा अधोसंरचना को साफ-सुथरा करना है। यह अभियान महात्मा गाँधी के जन्मदिवस 2  अक्टूबर 2014  को आरम्भ किया गया।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2019 तक पूर्ण स्वच्छता का वादा किया है।
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2 . घरेलू गैस सिलेंडर को डीबीटी से जोड़ा-  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घरेलू गैल को डॉयरेक्ट कैश-बैनिफिट ट्रांसफर स्कीम से जोड़ दिया, ताकि करीब 5 बिलियन डॉलर की सालाना सब्सिडी को बचाया जा सके।
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3 .जन धन योजना - इस योजना की घोषणा 15 अगस्त 2014 को तथा इसका शुभारंभ 28 अगस्त 2014 को भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस परियोजना की औपचारिक शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री ने सभी बैंको को इ-मेल भेजा जिसमें उन्होंने 'हर परिवार के लिए बैंक खाता' को एक ‘राष्‍ट्रीय प्राथमिकता’ घोषित किया और सात करोड़ से भी अधिक परिवारों को इस योजना में प्रवेश देने और उनका खाता खोलने के लिए सभी बैंको को कमर कसने को कहा |योजना के उद्घाटन के दिन ही 1.5 करोड़ बैंक खाते खोले गए।इस  योजना के जरिए करीब 15 करोड़ लोगों के बैंक खाते खुल गए, करीब 10 करोड़ रूपे कार्ड जारी हो गए |
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4 . रक्षा क्षेत्र में विदेश निवेश को मंजूरी -  नरेंद्र मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र में भी एफडीआई की सीमा को 49 फीसदी तक बढ़ा दिया और तकनकी स्थानांतरण क्षेत्र में इसे 74 फीसदी के करीब पहुंचा दिया।
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5  .100 स्‍मार्ट सिटी प्रोजेक्‍ट -इन परियोजनाओं पर कुल 1 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 100 स्मार्ट शहरों के विकास के लिए 'स्मार्ट सिटीज मिशन' तथा 500 शहरों के लिए शहरी रूपांतरण एवं नवीनीकरण अटल मिशन (अमरूत) को मंजूरी दी गई। शहरी विकास मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इन परियोजनाओं पर क्रमश: 48,000 करोड़ रुपये व 50,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
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6.मेक इन इंडिया - मेक इन इंडिया भारत सरकार द्वारा देशी और विदेशी कंपनियों द्वारा भारत में ही वस्तुओं के निर्माण पर ज़ोर देने के लिए बनाया गया है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 सितम्बर 2014 को किया था।
 
 
7.डिजिटल इंडिया -डिजिटल इंडिया भारत सरकार की एक पहल है जिसके तहत सरकारी विभागों को देश की जनता से जोड़ना है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिना कागज के इस्तेमाल के सरकारी सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक रूप से जनता तक पहुंच सकें। इस योजना का एक उद्देश्य ग्रामीण इलाकों को हाई स्पीड इंटरनेट के माध्यम से जोड़ना भी है।
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8. स्किल इंडिया -इस अभियान के अंतर्गत बेरोज़गारी को दूर करनेपे जोर दिया गया युवाओं को उनके कार्य कुशलता के आधार पर रोज़गार दिया जाने की योजना है |
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9.बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना -बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना (BBBP) महिलाओं एवं बाल विकास मंत्रालय ,स्वास्थ्य मंत्रालय और  परिवार कल्याण मंत्रालय एवं मानव संसाधन विकास की एक संयुक्त पहल के रुप में समन्वित और अभिसरित प्रयासों के अंतर्गत बालिकाओं को संरक्षण और सशक्त करने  के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत 22 जनवरी 2015 को की गई है और जिसे निम्न लिंगानुपात वाले 100 जिलों में प्रारंभ किया गया है। 
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10.प्रधानमंत्री उज्जवला योजना - इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण और निर्धन परिवार की महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिया जाएगा |इस  योजना के अंतर्गत बीपीएल परिवारों को 5 करोड़ एलपीजी कनेक्शन प्रदान करने के लिए आठ हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है |
 
 
मोदी सरकार की असफलताएं - मोदी सरकार कई मोर्चों पर असफल भी रही
 
1. काले धन की वापसी में नाकामी - चुनावी प्रचार के दौरान मोदी ने भारतीय जनता से ये वादा किया था की वो विदेशी बैंकों में रखा काला धन वापिस लाएंगे लेकिन ऐसा लगता है कि काला धन वापस आने में कई साल लग सकते हैं. अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल के हाथों में आ गया है |
इमेज - वन इंडिया 
 
2 . विदेश नीति में कमियां - मोदी सरकार आम लोगों के बीच यह प्रचारित कर रही है कि उनकी सरकार की विदेश नीति काफी उम्दा है, लेकिन विशेषज्ञों की राय इसके उलट है , नेपाल के साथ हमारे सम्बन्धो में कमी आई है नेपाल का चीन के प्रति झुकाव बढ़ रहा है मोदी ने कई यूरोपीय और अमरीकी  यात्राएं तो की लेकिन पड़ोसियों से सम्बन्ध बनने में विफल रहे है पाकिस्तान के साथ बातचीत होना फिर टूटना ,आतंकवाद के मुकदमों का आगे न बढ़ना और एक-दूसरे पर दोषारोपण करते जाना दोनों देशों की नीतिगत अगंभीरता को दिखाता है|
 
3. सुरक्षा व्यवस्था में कमी -पठानकोट हमला इस बात का जीता जगता उदहारण है और इसके साथ ही  पठानकोट हमले में पाकिस्तान का हाथ होने के ववजूत पाकिस्तान अधिकारीयों को जांच के लिए आने देना हमारी लचर व्यवस्था को दर्शाता है | यह हमला दो जनवरी को हुआ था जिसमें सेना के सात जवान शहीद हुए थे. भारत ने इसके लिए आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को जिम्मेदार ठहराया था. भारत का कहना है कि जैश प्रमुख मौलाना मसूद अजहर इस हमले का मास्टरमाइंड था |
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4 .  महगाई पर काबू न पा पाना -मॅहगाई दिन पे दिन बढ़ती जा रही दाल का २०० रू किलो होना इस बात को दर्शाता है की आम आदमी केलिए अब दाल रोटी भी काफी महंगी हो गई है |
 
5 .  बेरोज़गारी - इसके  अलावा बेरोज़गारी की समस्या भी जस की तस बनी हुई है, लोगों को पीने  के पानी  की अनुपलब्धता और पानी की उपलब्धता के लिए कोई सटीक उपाय नहीं किये जा रहे है , किसानों के लगातार आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे है  और महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी कोई गम्भीरता नहीं दिखाई पड़ रही है ,सरकार उपरोक्त सभी मामलों में  कमजोर पड़ती नजर आ रही है|
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इन् सबके वावजूद  सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज के सर्वे में कहा गया कि
70 फीसदी लोग नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं, जबकि इसके उलट 49 फीसदी लोग मोदी के कामकाज से खुश नहीं हैं.
यानी मोदी अब भी सबसे लोकप्रिय नेता बने हुए हैं. लगभग हर जनमत सर्वेक्षण में मोदी की लोकप्रियता कायम है |
 
 
 

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