अनुच्छेद 356, राजनीतिक उपयोग या दुरूपयोग

By: Deepa, 2016-04-03 17:30:00.0Category:  Awareness
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पिछले दिनों उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन 
लगने के बाद इस बात पर बहस बढ गई है कि क्या संविधान के अनुच्छेद 356 का दुरुपयुोग केंद्र सरकार के द्वारा अपने खुद के राजनीतिक हितों को पूर्ण करनेके लिए किया जा रहा है ?

क्या है अनुच्छेद 356 ? केंद्र की संघीय सरकार को राज्य में संवैधानिक तंत्र कि विफलता या संविधान के स्पष्ट उल्लंघन कि दिशा में उस राज्य सरकार को हटाकर उस राज्य सरकार में राष्ट्रपति शासन लागू करने का अधिकार देता है I 1950 में भारतीय संविधान के लागू होने के बाद से केंद्र सरकार द्वारा इसे 126 बार से भी ज्यादा बार प्रयोग किया जा चुका है I

1988 में जब कर्नाटका की एस. आर . बोम्मई के नेतृत्व वाली जनता दाल सरकार को अल्पमत की बताकर राष्ट्रपति शासन लगाया गया तो केंद्र सरकार को इस फैसले को चुनौती दी गई I सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह कहा की जब तक संसद के दोनों सदन राष्ट्रपति शासन लागू करने सम्बन्धी निर्णय को मंजूरी नहीं दे देते तब तक विधान सभा भंग नहीं हो सकती I

इस प्रकार कुछ लगाम लगी I राजनितिक पार्टियों को संविधान द्वारा निर्मित संघ -राज्य प्रणाली का सम्मान करते हुए भारतीय जनता के हितों को ध्यान में रखना चाहिए परन्तु वे अपने राजनीतिक लोभ को सर्वोपरि मानते हैं

उत्तराखंड में अपनी सरकार के गिरने पे रोने वाली कांग्रेस शायद यह भूल गई की सबसे ज्यादा दुर्पयोग अनुछेद 356 का उन्ही के द्वारा किया गया I अकेले इंदिरा गांधी ने 50 से ज्यादा बार इस अनुछेद का उपयोग कर कई राज्यों की सरकार को गिराया I संविधान को हथियार की तरह इस्तेमाल करने वाली राजनीतिक पार्टियां यह भूल जाती हैं की भारतीय जनता के सामने वो क्या उदहारण रख रहे हैं ? इसके गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए राजनीतिक पार्टियों को खुद आगे आना पड़ेगा I विधयाकों को अपने नेता पर नेता को अपनी राजनीतिक पार्टी पर और राजनीतिक पार्टियों को अपने देश पे भरोसा और सम्मान रखना पड़ेगा और संविधान को सर्वोपरि मानना होगा I

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